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उत्तराखंड: होटल-होमस्टे संचालकों के लिए नए नियम लागू; 5 साल में रिन्यूअल अनिवार्य, बाहरी लोगों पर ‘नकेल’

देहरादून:पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड में होटल व्यवसायियों और होमस्टे संचालकों के लिए बड़ी खबर है। पर्यटन विभाग ने ‘उत्तराखंड पर्यटन यात्रा व्यवसाय नियमावली 2014’ में संशोधन करते हुए रजिस्ट्रेशन और संचालन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब होटल, मोटल, स्पा और रिसॉर्ट्स के लिए ‘वन टाइम रजिस्ट्रेशन’ की व्यवस्था …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 22 जन, 2026
उत्तराखंड: होटल-होमस्टे संचालकों के लिए नए नियम लागू; 5 साल में रिन्यूअल अनिवार्य, बाहरी लोगों पर ‘नकेल’

देहरादून:पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड में होटल व्यवसायियों और होमस्टे संचालकों के लिए बड़ी खबर है। पर्यटन विभाग ने ‘उत्तराखंड पर्यटन यात्रा व्यवसाय नियमावली 2014’ में संशोधन करते हुए रजिस्ट्रेशन और संचालन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब होटल, मोटल, स्पा और रिसॉर्ट्स के लिए ‘वन टाइम रजिस्ट्रेशन’ की व्यवस्था खत्म कर दी गई है और हर 5 साल में रिन्यूअल अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ ही, होमस्टे योजना का लाभ अब केवल राज्य के मूल निवासियों को ही मिलेगा.

नियमों में हुए प्रमुख बदलाव:

​1. हर 5 साल में रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल अनिवार्य:

अब तक ट्रैवल ट्रेड रजिस्ट्रेशन में होटल, मोटल, एडवेंचर एक्टिविटीज, टेंट कॉलोनी, स्पा और हेल्थ रिजॉर्ट आदि को केवल एक बार (One Time) रजिस्ट्रेशन कराना होता था. लेकिन अब नई पॉलिसी के तहत सभी को हर 5 साल में अपना रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराना होगा. उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की अपर निदेशक पूनम चंद के अनुसार, पहले से रजिस्टर्ड कई होटलों की स्थिति का पता नहीं चल पा रहा था, इसलिए यह कदम उठाया गया है.

​2. होमस्टे का बदला स्वरूप: ‘केयरटेकर कल्चर’ खत्म

पर्यटन विभाग ने होमस्टे और केंद्र सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (B&B) योजना को ट्रैवल एंड ट्रेड रजिस्ट्रेशन में मर्ज कर दिया है.

​होमस्टे: अब यह योजना केवल राज्य के स्थाई निवासियों के लिए होगी. अनिवार्य शर्त यह है कि मकान मालिक को उसी घर में रहना होगा और खुद होमस्टे संचालित करना होगा. यदि कोई केयरटेकर के माध्यम से होमस्टे चला रहा है, तो उसे होमस्टे योजना का लाभ (बिजली और कमर्शियल टैक्स में छूट) नहीं मिलेगा.

​बेड एंड ब्रेकफास्ट: शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक पर्यटन या केयरटेकर के जरिए प्रॉपर्टी चलाने वालों को अब ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ स्कीम के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

अपर निदेशक पूनम चंद ने बताया कि होमस्टे योजना का उद्देश्य ग्रामीण संस्कृति को बढ़ावा देना था, लेकिन यह शहरी क्षेत्रों में ज्यादा पॉपुलर हो रही थी. कई बाहरी लोग उत्तराखंड में इन्वेस्ट कर केयरटेकर के जरिए होमस्टे चला रहे थे और सरकारी सब्सिडी (बिजली/टैक्स छूट) का लाभ उठा रहे थे, जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा था.

​आंकड़ों में उत्तराखंड के होमस्टे

वर्तमान में प्रदेश में लगभग 6000 होमस्टे रजिस्टर्ड हैं.

​नैनीताल: पहले स्थान पर (सर्वाधिक होमस्टे).

​देहरादून: दूसरे स्थान पर.

​पिथौरागढ़: तीसरे स्थान पर.

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