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उत्तराखंड: सुरंगों को मिलेगा ‘हवाई सुरक्षा कवच’, सिलक्यारा हादसे से सबक लेकर सिविल एविएशन का बड़ा प्लान.

देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ अब सुरक्षा व्यवस्था को भी अभेद्य बनाया जा रहा है। साल 2023 के उत्तरकाशी स्थित सिलक्यारा सुरंग हादसे से बड़ा सबक लेते हुए, राज्य का नागरिक उड्डयन विभाग एक अहम योजना पर काम कर रहा …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 24 फ़र, 2026
उत्तराखंड: सुरंगों को मिलेगा ‘हवाई सुरक्षा कवच’, सिलक्यारा हादसे से सबक लेकर सिविल एविएशन का बड़ा प्लान.

देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ अब सुरक्षा व्यवस्था को भी अभेद्य बनाया जा रहा है। साल 2023 के उत्तरकाशी स्थित सिलक्यारा सुरंग हादसे से बड़ा सबक लेते हुए, राज्य का नागरिक उड्डयन विभाग एक अहम योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत राज्य की प्रमुख रेलवे सुरंगों के पास स्थायी हेलीपैड बनाए जाएंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा के समय राहत और बचाव कार्य  बिना किसी देरी के शुरू किए जा सकें।

उत्तराखंड: सुरंगों को मिलेगा ‘हवाई सुरक्षा कवच’, सिलक्यारा हादसे से सबक लेकर सिविल एविएशन का बड़ा प्लान

सिलक्यारा हादसे ने बदला आपदा प्रबंधन का नजरिया

नवंबर 2023 में उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग के निर्माण के दौरान एक हिस्सा ढहने से 41 मजदूर 17 दिनों तक अंदर फंसे रहे थे। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित पहुंच के कारण बचाव दलों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों के साथ मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र का होना अनिवार्य है।

क्या है सिविल एविएशन का नया प्लान?

राज्य के नागरिक उड्डयन विभाग के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन या भारी बारिश के कारण अक्सर सड़क मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। ऐसे में त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए हवाई सेवा सबसे प्रभावी माध्यम है।

  • हेलीपैड का निर्माण: विभाग एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसके तहत प्रत्येक प्रमुख रेलवे सुरंग की शुरुआत (मुहाने) या उसके निकट हेलीपैड विकसित किए जाएंगे।

  • बहुउद्देश्यीय उपयोग: इन हेलीपैड का उद्देश्य केवल सुरंग के भीतर की आपात स्थिति से निपटना नहीं होगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में बाढ़, बादल फटने या दुर्घटना की स्थिति में भी त्वरित हवाई सहायता उपलब्ध कराना होगा।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर खास फोकस

वर्तमान में उत्तराखंड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन में 17 प्रमुख सुरंगें बनाई जा रही हैं।

  • अंडरग्राउंड नेटवर्क: इस परियोजना का लगभग 104 किलोमीटर हिस्सा पहाड़ों को चीरकर सुरंगों के अंदर से गुजरेगा।

  • वैकल्पिक मार्ग: किसी भी तकनीकी या प्राकृतिक बाधा से निपटने के लिए 12 आपातकालीन (Emergency) सुरंगें भी बनाई जा रही हैं। सुरंगों के पास हेलीपैड बनने से इस महात्वाकांक्षी परियोजना को एक बहुस्तरीय सुरक्षा कवच मिल जाएगा।

राहत और बचाव कार्यों को मिलेगी रफ्तार

सुरंगों के पास हेलीपैड स्थापित होने से आपदा प्रबंधन में कई बड़े फायदे होंगे:

  • विशेषज्ञों की त्वरित पहुंच: दुर्घटना की स्थिति में NDRF, SDRF, मेडिकल टीमों और तकनीकी विशेषज्ञों को मिनटों में घटनास्थल पर पहुंचाया जा सकेगा।

  • तत्काल एयरलिफ्ट: गंभीर रूप से घायल लोगों को सड़क मार्ग के लंबे और मुश्किल सफर के बजाय सीधे एयरलिफ्ट कर बड़े अस्पतालों में पहुंचाया जा सकेगा।

  • सड़कों पर निर्भरता कम: मौसम खराब होने या रास्ते बंद होने की स्थिति में राहत कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

भविष्य की चुनौतियां और रूपरेखा

राज्य सरकार इसे केवल रेलवे तक सीमित न रखकर एक व्यापक आपदा प्रबंधन रणनीति के रूप में देख रही है। हालांकि, इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारने के लिए अभी उच्च स्तर पर स्वीकृति, भूमि की उपलब्धता और पर्यावरणीय मंजूरियों जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। यदि यह योजना लागू होती है, तो यह देश के अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए भी एक ‘मॉडल आपदा प्रबंधन व्यवस्था’ बन सकती है।

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