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नर्सिंग अभ्यर्थी के साथ पानी की टंकी पर चढ़ी महिला कांग्रेसी प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, लगाया अनदेखी का आरोप

राजधानी देहरादून के एकता विहार स्थित धरना स्थल पर वर्षवार नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलनरत नर्सिंग एकता मंच से जुड़े चार अभ्यर्थी अल सुबह सर्वे चौक के निकट स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए. उनके मांगों के समर्थन में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला भी पानी …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 11 मई, 2026
नर्सिंग अभ्यर्थी के साथ पानी की टंकी पर चढ़ी महिला कांग्रेसी प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, लगाया अनदेखी का आरोप

राजधानी देहरादून के एकता विहार स्थित धरना स्थल पर वर्षवार नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलनरत नर्सिंग एकता मंच से जुड़े चार अभ्यर्थी अल सुबह सर्वे चौक के निकट स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए. उनके मांगों के समर्थन में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला भी पानी की टंकी पर चढ़ गई. इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद है, तो वहीं टंकी पर चढ़े नर्सिंग अभ्यर्थियों के साथी टंकी के समीप धरना देते हुए अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं.

 

अनिश्चितकालीन धरने के 156 दिन और 22 दिनों तक आमरण अनशन पर एकता विहार स्थित धरना स्थल पर आंदोलनरत नर्सिंग एकता मंच से जुड़े चार अभ्यर्थी आज सवेरे पानी की टंकी पर चढ़ गए, जिसके बाद मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद है. आक्रोशित नर्सिंग अभ्यर्थियों के कुछ साथी एक तरफ जहां पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ नर्सिंग एकता मंच से जुड़े आंदोलनकारी टंकी के समीप धरना देकर अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. बीते लंबे समय से आंदोलन कर रहे नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि निरंतर धरना देने आमरण अनशन करने के बावजूद सरकार ने उनकी मांगों को लेकर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है.

अनशन के दौरान उनके कई साथियों की स्वास्थ्य स्थिति भी बिगड़ी है. उसके बाद भी सरकार ने उनकी न्याय संगत मांगों की अनदेखी की. नर्सिंग एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है तब तक उनके साथी पानी की टंकी से नीचे नहीं उतरेंगे. उन्होंने कहा कि आमरण अनशन करते हुए उनके 12 साथी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं, जबकि पांच अभ्यर्थी आईसीयू में इलाज करा चुके हैं ,लेकिन सरकार ने उनकी मांगों को लेकर कोई सुध नहीं ली है, अगर उनकी मांगें मान ली जाती तो उन्हें इस तरह का कदम नहीं उठाना पड़ता. नवल का कहना है कि पहले से ही हम चाह रहे थे कि कम्युनिकेशन के माध्यम से ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे अभ्यर्थियों के हितों को लेकर कोई रास्ता निकल सके, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है.

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