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ED: ईडी ने अनिल अंबानी को किया तलब, हजारों करोड़ के ऋण घोटाले की जांच तेज

मुंबई:आर्थिक अपराधों की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी को आगामी 5 अगस्त को अपने दिल्ली कार्यालय में हाजिर होने का समन भेजा है। यह निर्देश उनकी कंपनियों पर लगे बड़े पैमाने पर ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 01 अग, 2025
ED: ईडी ने अनिल अंबानी को किया तलब, हजारों करोड़ के ऋण घोटाले की जांच तेज

मुंबई:आर्थिक अपराधों की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी को आगामी 5 अगस्त को अपने दिल्ली कार्यालय में हाजिर होने का समन भेजा है। यह निर्देश उनकी कंपनियों पर लगे बड़े पैमाने पर ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के मद्देनजर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, 66 साल के अनिल अंबानी से पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के अंतर्गत विस्तृत पूछताछ की जाएगी।

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यह कड़ी कार्रवाई गत सप्ताह 24 जुलाई से आरंभ हुए तीन दिनी व्यापक सर्च ऑपरेशन के उपरांत की गई है, जिसके दौरान मुंबई महानगर में 35 से ज्यादा स्थानों पर एकसाथ छापेमारी हुई। इस अभियान में कुल 50 कंपनियों और 25 व्यक्तियों के कार्यस्थल एवं आवास शामिल किए गए, जिनमें अंबानी समूह से जुड़ी विभिन्न कंपनियों के उच्च पदस्थ अधिकारी भी थे। केंद्रीय जांच एजेंसी का मुख्य निशाना 2017-2019 की अवधि में यस बैंक से अंबानी समूह को मिले करीब 3000 करोड़ रुपये के संदिग्ध ऋण और उसके गलत इस्तेमाल पर है।

ईडी की जांच से पता चला है कि ऋण मंजूरी से ठीक पहले यस बैंक के प्रमोटरों के व्यावसायिक हितों में पैसा आया था, जो रिश्वतखोरी और ऋण मंजूरी के बीच संभावित संबंध का संकेत देता है। एजेंसी का आरोप है कि रिलायंस समूह की कंपनियों को यस बैंक से ऋण की मंजूरी में गंभीर नियमों का उल्लंघन हुआ है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय आवास बैंक, सेबी, एनएफआरए, बैंक ऑफ बड़ौदा और केंद्रीय जांच ब्यूरो की दो एफआईआर सहित कई नियामक संस्थानों से मिली जानकारी के आधार पर की गई है।

स्थिति और भी गंभीर हो गई है जब हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस को ‘फ्रॉड’ की श्रेणी में वर्गीकृत किया है। 13 जून 2025 को, आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार एसबीआई ने यह कदम उठाया और 24 जून को आरबीआई को इसकी सूचना दी। बैंक अब सीबीआई में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।

रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड पर 14000 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण धोखाधड़ी का गंभीर आरोप है। इसके अतिरिक्त, कंपनी पर केनरा बैंक के साथ भी 1050 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है। जांच एजेंसियों का कहना है कि कुल मिलाकर 10000 करोड़ रुपये से अधिक के सामूहिक ऋण डायवर्जन की संभावना है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कंपनी के अघोषित विदेशी बैंक खातों और विदेशी संपत्तियों की भी विस्तृत जांच की जा रही है।

इस पूरे मामले में रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्टॉक एक्सचेंज को आश्वासन दिया है कि इन छापों का उनके व्यावसायिक संचालन, वित्तीय प्रदर्शन या हितधारकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। हालांकि, जांच में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है, जो भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय का संकेत देते हैं।

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