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शादीशुदा औरतों की जान खतरे में – पढ़िए सच

शादीशुदा औरतों की जान खतरे में : दुनियाभर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. यह रिपोर्ट बताती है कि घर में रहने वाली शादीशुदा महिलाओं और युवतियों की जान खतरे में है. आंकड़ों के अनुसार, 2023 में महिलाओं की हत्या के 60% मामलों …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 29 नव, 2024
शादीशुदा औरतों की जान खतरे में – पढ़िए सच

शादीशुदा औरतों की जान खतरे में : दुनियाभर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. यह रिपोर्ट बताती है कि घर में रहने वाली शादीशुदा महिलाओं और युवतियों की जान खतरे में है. आंकड़ों के अनुसार, 2023 में महिलाओं की हत्या के 60% मामलों में अपराधी उनके पति या परिवार के सदस्य ही थे।

हर दिन 140 महिलाएं बनती हैं शिकार

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हर दिन 140 महिलाएं अपने पार्टनर के हाथों अपनी जान गंवाती हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में पुरुषों द्वारा मारी गईं 85,000 महिलाओं में से 51,100 हत्याएं उनके करीबी लोगों द्वारा की गईं. अध्ययन से पता चला है कि महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक जगह उनका घर ही बन गया है।

घर में होती है सबसे ज्यादा हिंसा

यूएन वूमेन की उप कार्यकारी निदेशक ने कहा कि यह डेटा यह दिखाता है कि महिलाओं के जीवन को लेकर स्थिति कितनी भयावह है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिलाएं घर पर गंभीर हिंसा का सामना करती हैं, जो उनकी जान तक ले लेती है।

पढ़िए सच

स्त्री-हत्या पर वैश्विक रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में स्त्री-हत्या को लिंग-संबंधी हत्या के रूप में परिभाषित किया गया है. आंकड़े बताते हैं कि 2022 तक महिलाओं और लड़कियों की जानबूझकर की जाने वाली मौतों की संख्या में समग्र रूप से कमी आई है. लेकिन अंतरंग साझेदारों और परिवार के सदस्यों द्वारा महिलाओं की हत्या के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।

अफ्रीका में सबसे ज्यादा हत्याएं

रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में अफ्रीका में स्त्री-हत्या के 21,700 मामले सामने आए, जो सबसे अधिक हैं. इसके बाद अमेरिका और ओशिनिया का स्थान है. यूरोप और अमेरिका में भी महिलाओं की उनके अंतरंग साथियों द्वारा हत्या की घटनाएं चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं।

घर की चारदीवारी में छिपा खतरा

संयुक्त राष्ट्र ने यह निष्कर्ष निकाला है कि घर, जो एक सुरक्षित स्थान होना चाहिए, महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है. यह रिपोर्ट न केवल लिंग समानता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज के भीतर महिलाओं के प्रति सोच और रवैये में बदलाव की सख्त जरूरत भी बताती है।

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