देहरादून: उत्तराखंड में पूर्व विधायकों की पेंशन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और छह बार के विधायक बिशन सिंह चुफाल ने पूर्व विधायकों की आर्थिक तंगी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विधायकों के खर्चे बहुत ज्यादा होते हैं, यहां तक कि कई बार बीड़ी भी मांगकर पीनी पड़ती थी।
दरअसल, एक पत्रकार ने उनसे विधायकों और पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने के प्रस्ताव पर सवाल किया था, जबकि सरकारी कर्मचारियों को पेंशन न मिलने का मुद्दा भी उठाया। इस पर चुफाल ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए विधायकों की वित्तीय चुनौतियों पर बात की।
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चुफाल का राजनीतिक सफर
बिशन सिंह चुफाल 1996 से लगातार पिथौरागढ़ विधानसभा सीट से विधायक चुने जाते आ रहे हैं। वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विधायकों की पेंशन व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) बहाल करने की मांग पर बहस तेज हो गई है।
विधायकों की पेंशन पर बढ़ी बहस
चुफाल के इस बयान के बाद विपक्ष और जनता के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकारी कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिल रही है, तो विधायकों की पेंशन में बढ़ोतरी क्यों होनी चाहिए?
क्या कहती है वर्तमान पेंशन व्यवस्था?
उत्तराखंड में पूर्व विधायकों को जीवनभर पेंशन दी जाती है, जबकि सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बंद कर दी गई थी। इस मुद्दे पर सरकारी कर्मचारी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं।
बयान से उठे सवाल
- क्या पूर्व विधायकों को भी सरकारी कर्मचारियों की तरह पेंशन बंद कर देनी चाहिए?
- क्या सरकार को जनता के टैक्स का सही इस्तेमाल करने पर विचार करना चाहिए?
- क्या विधायकों के लिए पेंशन के नियमों में बदलाव किए जाने चाहिए?
चुफाल के इस बयान के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है, और अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।