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हैरान कर देगा पेंशन सिस्टम का इतिहास

हैरान कर देगा पेंशन सिस्टम का इतिहास : खोजी नारद टीम आपको रोजाना दिलचस्प , रोचक और आपके मतलब की ढेरों जानकारियां देता है। इसी कड़ी में आज बात करेंगे बुढ़ापे की लाठी की .. जब व्यक्ति रिटायर होता है, तो उसे आर्थिक सहारे के लिए नियमित रूप से एक …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 01 अप्र, 2025
हैरान कर देगा पेंशन सिस्टम का इतिहास

हैरान कर देगा पेंशन सिस्टम का इतिहास :  खोजी नारद टीम आपको रोजाना दिलचस्प , रोचक और आपके मतलब की ढेरों जानकारियां देता है। इसी कड़ी में आज बात करेंगे बुढ़ापे की लाठी की .. जब व्यक्ति रिटायर होता है, तो उसे आर्थिक सहारे के लिए नियमित रूप से एक निश्चित राशि दी जाती है, जिसे बुढ़ापे की लाठी यानी पेंशन कहते हैं. यह मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों, सैनिकों और बुजुर्गों को मिलती है, ताकि वे जीवनयापन कर सकें.पेंशन का इतिहास बहुत पुराना है. सबसे पहले रोमन सम्राट ऑगस्टस ने सैनिकों के लिए पेंशन योजना शुरू की थी. उस समय सेना में लंबे समय तक सेवा देने वालों को जमीन और धन दिया जाता था, ताकि वे आरामदायक जीवन बिता सकें।

आधुनिक पेंशन सिस्टम की नींव 1889 में जर्मनी के चांसलर ओटो वॉन बिस्मार्क ने रखी थी. उन्होंने सरकारी पेंशन योजना लागू की, जिसमें 70 साल से अधिक उम्र के लोगों को राज्य द्वारा पेंशन मिलती थी.यूरोप में औद्योगिक क्रांति के दौरान पेंशन प्रणाली का विस्तार हुआ और कई देशों ने अपने कर्मचारियों के लिए पेंशन स्कीम शुरू की, जिससे बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा मिलने लगी।

भारत में पेंशन व्यवस्था ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई. सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए पेंशन प्रणाली लागू की थी, जिससे सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सहायता मिलती थी.ब्रिटिश सरकार ने 19वीं सदी में सिविल सेवकों और सैनिकों के लिए औपचारिक पेंशन योजना लागू की, जिसे बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा और अन्य सरकारी सेवाओं तक बढ़ाया गया।

आज भारत में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग पेंशन योजनाएं हैं, जैसे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और अन्य सरकारी योजनाएं, जो रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।

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